Rajasthan to Ireland : जय मुंद्रा की संघर्ष और जुनून भरी कहानी

Rajasthan to Ireland : जय मुंद्रा की संघर्ष और जुनून भरी कहानी

क्रिकेट के प्रति जुनून की कोई सीमा नहीं होती, और जय मुंद्रा की यात्रा इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है। राजस्थान के टोंक शहर से आने वाले जय मुंद्रा आयरलैंड की क्रिकेट पिच तक पहुँचने का उनका सफर धैर्य, त्याग और सपनों को साकार करने की अद्भुत कहानी है। आइए आपको बताते है पूरी जानकारी ।

Rajasthan to Ireland

शुरुआती दिन: टोंक की मिट्टी से मिली क्रिकेट की प्रेरणा

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जय मुंद्रा का जन्म 10 जनवरी 1997 को राजस्थान के टोंक में हुआ था. टोंक वही जगह है जिसने भारत को खलील अहमद जैसे तेज गेंदबाज दिए हैं, इसलिए क्रिकेट का जुनून वहाँ की मिट्टी में पहले से ही मौजूद था. जय ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत कोच इम्तियाज अली की देखरेख में की. शुरुआत में उनका सपना बहुत सरल था—जितनी तेज हो सके, उतनी तेज गेंद फेंकनी थी. 16 साल की उम्र तक आते-आते, वे एक तेज गेंदबाज के साथ-साथ एक अच्छे बल्लेबाज और स्लो-लेफ्ट आर्म स्पिनर भी बन गए थे. उन्होंने अंडर-14 स्तर पर टोंक और राजस्थान दोनों का प्रतिनिधित्व भी किया…

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सपनों पर पढ़ा पढ़ाई का दबाव

मिडल-क्लास परिवारों में क्रिकेट के सपनों का सबसे बड़ा मुकाबला पढ़ाई से होता है। उनको अपने जीवन में बहुत सी तकलीफें झेलनी पड़ती है क्योंकि कोई भी मिडिल क्लास को इसी जगह से निकलना बहुत मुश्किल होता है जय के साथ भी यही था जय के पिता ने स्पष्ट कर दिया था कि पहले इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करें, उसके बाद ही क्रिकेट के बारे में सोचें. परिवार की उम्मीदों के बोझ तले उनका क्रिकेट का सपना धीरे-धीरे दबने लगा. उन्होंने चेन्नई के SRM इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया. ग्रेजुएशन के बाद उन्हें एक अच्छी नौकरी भी मिल गई, लेकिन दिल में अभी भी क्रिकेट बाकी था.

यक एतिहासिक दिन और आयरलैंड तक का सफ़र 

जब जय ने अपनी नौकरी के कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किया, तब उन्हें लगा कि उनका क्रिकेट करियर हमेशा के लिए खत्म हो गया है. लेकिन अगले ही साल, कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया. बिना किसी गारंटी के, सिर्फ क्रिकेट को एक आखिरी मौका देने के लिए उन्होंने स्टूडेंट वीजा लिया. मई 2021 में, जय आयरलैंड पहुँच गए. वहां वे TU डबलिन में अपनी पढ़ाई के साथ-साथ एक ऐसे क्रिकेट सिस्टम का हिस्सा बनना चाहते थे, जहाँ बेहतर सुविधाएं मिल सकें और आगे बढ़ने का रास्ता खुल सके.

जय मुंद्रा की यह कहानी हमें सिखाती है कि यदि इरादे पक्के हों, तो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को दोबारा जीवित किया जा सकता है।

तो आपको कैसी लगी जय मुंद्रा की कहानी जानो जरूरी की जुबानी अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं ।

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