Why IPL TRP Dropped After Fantasy Apps Ban? : फैंटेसी ऐप्स के बैन होने से कैसे घटी IPL की TRP और व्यूअरशिप असली सच

इण्डियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल (IPL) को हम सब क्रिकेट का सबसे बड़ा त्योहार मानते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से आईपीएल की टीवी टीआरपी (TV TRP) और व्यूअरशिप में एक बड़ी गिरावट देखने को मिली है। ब्रॉडकास्टर्स और बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स परेशान हैं कि आखिर लोग आईपीएल देखना कम क्यों कर रहे हैं। लेकिन इसकी जो सबसे असली और बड़ी वजह है, वो कोई खराब मैच या खिलाड़ियों की परफॉर्मेंस नहीं है। असली वजह है—फैंटेसी स्पोर्ट्स ऐप्स (Fantasy Sports Apps) पर लगा बैन।
आइए विस्तार से समझते हैं कि कैसे ड्रीम11 (Dream11) और माई11सर्कल (My11Circle) जैसे ऐप्स के बैन होने से आईपीएल का नया फैन कल्चर और टीआरपी दोनों ढेर हो गए।
Why IPL TRP Dropped After Fantasy Apps Ban?
फैंटेसी ऐप्स: आईपीएल की व्यूअरशिप का असली इंजन
पिछले कुछ सालों में आईपीएल को सुपरहिट बनाने में ड्रीम11, माई11सर्कल और माईटीम11 जैसे फैंटेसी ऐप्स ने सबसे बड़ा रोल निभाया था। ये कंपनियां सिर्फ स्टेडियम में विज्ञापन नहीं दिखाती थीं, बल्कि इन्होंने देश के करोड़ों क्रिकेट फैंस को एक अलग ही नशा दे दिया था।
मैच शुरू होने से पहले, लोग इन ऐप्स पर अपनी टीम बनाते थे और अपना खुद का पैसा दांव पर लगाते थे। इस वजह से एक ऐसा नेटवर्क तैयार हुआ जिसने आम लोगों को टीवी स्क्रीन से चिपका कर रखा।
बोरिंग मैच में भी फैंस को बांधे रखने का राज
मान लीजिए सोमवार की रात को दो ऐसी टीमों का मैच चल रहा है जो पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी हैं, और उनका जीतना या हारना मायने नहीं रखता। एक आम क्रिकेट फैन क्या करेगा? वह टीवी बंद करेगा और सो जाएगा।
लेकिन अगर उस फैन ने किसी फैंटेसी ऐप पर उस मैच की हारने वाली टीम के किसी खिलाड़ी को अपनी टीम का कैप्टन (Captain) या वाइस-कैप्टन (Vice-Captain) बनाया है, तो कहानी बदल जाती है। क्योंकि अब उसकी जेब का पैसा लगा हुआ है, इसलिए वह मजबूरी में पूरा 3.5 घंटे का मैच लाइव देखेगा। वह टीम के लिए नहीं, बल्कि अपने लगाए हुए पैसे और पॉइंट्स के लिए एक-एक बॉल पर नजर रखेगा। इसी वजह से बोरिंग से बोरिंग मैच को भी पहले भारी टीआरपी मिलती थी।
सरकार का सख्त कदम और बैन
रियल-मनी गेमिंग और सट्टेबाजी की इस लत को देखते हुए सरकार ने एक बहुत बड़ा और सख्त कदम उठाया। सरकार ने इन फैंटेसी ऐप्स पर पूरी तरह से बैन लगा दिया।
बैंकिंग ट्रांजैक्शन पर रोक: सरकार ने सभी बैंकों को आदेश दिया कि इन गेमिंग कंपनियों के साथ किसी भी तरह का फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन (पैसा लेना या देना) नहीं किया जाएगा।
भारी जुर्माना और जेल: अगर कोई भी कंपनी या बैंक इस आदेश को नहीं मानता, तो उस पर ₹10 लाख का भारी जुर्माना, उनका रजिस्ट्रेशन रद्द होना और 3 साल तक की जेल का प्रावधान किया गया।
इस सख्त कानून की वजह से जो गेमिंग इंडस्ट्री साल 2024 तक लगभग ₹232 अरब ($10-15 billion) की हो चुकी थी, वह एक झटके में पूरी तरह तबाह हो गई।
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आंकड़ों की जुबानी: आईपीएल 2026 में टीआरपी का बड़ा ड्रॉप
जैसे ही इन फैंटेसी ऐप्स पर बैन लगा और लोगों का पैसा लगना बंद हुआ, आईपीएल की व्यूअरशिप का असली चेहरा सामने आ गया। फैंस को समझ आ गया कि जब उनका कोई फाइनेंशियल फायदा नहीं है, तो वो इतने लंबे टूर्नामेंट को देख कर अपना समय क्यों खराब करें।
एडवरटाइजर्स ने भी खींचे अपने हाथ
जब टीवी पर देखने वाले दर्शक ही कम हो गए, तो बड़ी-बड़ी ब्रांड्स और कंपनियां जो आईपीएल के दौरान विज्ञापन दिखाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती थीं, उन्होंने भी अपने हाथ पीछे खींच लिए।
ब्रांड्स की कमी: आईपीएल 2025 में जहां 65 से ज्यादा ब्रांड्स ने विज्ञापन दिया था, वहीं आईपीएल 2026 में यह संख्या घटकर सिर्फ 45 ब्रांड्स पर आ गई।
विज्ञापनों में गिरावट: कुल एडवरटाइजर्स की संख्या में लगभग 31% की कमी आई है।
फैंटेसी ऐप्स ने आईपीएल को जो दर्शक दिए थे, वो क्रिकेट के असली दीवाने नहीं थे, बल्कि पैसे कमाने के लालच में जुड़े हुए लोग थे। इन ऐप्स पर बैन लगते ही आईपीएल का नकली गुब्बारा फट गया और असली फैन कल्चर सामने आ गया है। अब ब्रॉडकास्टर्स के लिए यह सबसे बड़ा चैलेंज है कि बिना किसी पैसे के लालच के, वो असली क्रिकेट प्रेमियों को दोबारा टीवी और मोबाइल स्क्रीन्स पर कैसे वापस लेकर आते हैं।
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