Connor Williams Most Unlucky Cricketer : टेस्ट मैच खेला, 42 रन भी बनाए… फिर भी ICC रिकॉर्ड्स में ‘Uncapped’ रह गया भारत का यह बड़ौदा सुपरस्टार खिलाड़ी!
क्रिकेट की दुनिया में हमने कई अनलकी खिलाड़ियों की कहानियां सुनी हैं, लेकिन क्या आपने कभी किसी ऐसे खिलाड़ी के बारे में सुना है जिसने देश के लिए टेस्ट मैच खेला, मैदान पर उतरकर रन भी बनाए, लेकिन आज भी आईसीसी (ICC) के रिकॉर्ड्स में उसका कोई अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू दर्ज नहीं है?
हम बात कर रहे हैं बड़ौदा के सुपरस्टार कॉनर विलियम्स (Connor Williams) की. साल 2001 में दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर उनके साथ एक ऐसा ऐतिहासिक हादसा हुआ, जिसने उनके पूरे करियर की दिशा ही बदल दी. आइए जानते हैं कॉनर विलियम्स के जन्म, उनके राज्य और क्रिकेट जगत के इस सबसे हैरान कर देने वाले विवाद की पूरी कहानी।
Connor Williams Most Unlucky Cricketer

जन्म और शुरुआती सफर: बड़ौदा का वो उभरता हुआ सितारा
कॉनर विलियम्स का जन्म 24 मई 1973 को भावनगर, गुजरात में हुआ था। वह घरेलू क्रिकेट में बड़ौदा की टीम के लिए एक सलामी बल्लेबाज (Opening Batsman) के रूप में खेलते थे. घरेलू सत्रों में लगातार शानदार प्रदर्शन और ढेरों रन बनाने के बाद आखिरकार उन्हें भारतीय टेस्ट टीम में शामिल होने का मौका मिला. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
साल 2001 का वो विवाद जिसने हिला दिया क्रिकेट जगत
यह पूरी घटना साल 2001 की है, जब भारतीय टीम दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर थी. भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच टेस्ट सीरीज चल रही थी, लेकिन दूसरे टेस्ट मैच के बाद एक बहुत बड़ा विवाद खड़ा हो गया. मैच रेफरी माइक डेनेस (Mike Denness) ने भारत के 6 खिलाड़ियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन पर बैन लगा दिया.
इन खिलाड़ियों में महान सचिन तेंदुलकर भी शामिल थे, जिन पर बॉल टैंपरिंग (गेंद से छेड़छाड़) का झूठा आरोप लगाया गया था. इस फैसले से भारतीय फैंस बेहद नाराज हो गए और यह बात भारतीय संसद तक पहुंच गई.
ऐसे हुई कॉनर विलियम्स की टीम में एंट्री
इस बड़े विवाद के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट बोर्ड ने मिलकर एक हैरान करने वाला फैसला लिया. उन्होंने तीसरे टेस्ट मैच से रेफरी माइक डेनेस को हटाने का मन बना लिया. चूंकि रेफरी को हटा दिया गया था, इसलिए वीरेंद्र सहवाग पर लगा एक मैच का प्रतिबंध इस मैच में लागू नहीं हो सकता था, लेकिन आईसीसी इस बात पर अड़ गया कि सहवाग यह मैच नहीं खेल सकते.
सहवाग के बाहर होने के कारण, अंतिम एकादश (Playing XI) में बड़ौदा के सलामी बल्लेबाज कॉनर विलियम्स को टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने का मौका मिला. इतने भारी दबाव वाले मैच में उन्होंने भारत की तरफ से ओपनिंग की और दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाजों का सामना करते हुए पहली पारी में 42 रन की एक जुझारू पारी खेली।
मैच तो खेला, रन भी बनाए… लेकिन रिकॉर्ड से नाम गायब!
कॉनर विलियम्स ने मैदान पर उतरकर देश के लिए पूरी शिद्दत से बल्लेबाजी की. लेकिन मैच खत्म होने के बाद आईसीसी (ICC) ने एक बड़ा झटका दिया। चूंकि यह मैच बिना आधिकारिक रेफरी के खेला गया था, इसलिए आईसीसी ने इस तीसरे टेस्ट मैच को ‘आधिकारिक टेस्ट’ मानने से साफ मना कर दिया और इसे ‘अनाधिकारिक मैच’ (Unofficial Match) घोषित कर दिया.
इस एक फैसले के कारण कॉनर विलियम्स के बनाए गए रन और उनका वह टेस्ट मैच इतिहास के पन्नों से हमेशा के लिए मिटा दिया गया. आईसीसी के रिकॉर्ड्स के अनुसार उनका कभी अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू ही नहीं हुआ और वह हमेशा के लिए एक ‘अनकैप्ड खिलाड़ी’ बनकर रह गए.
इस मैच के बाद कॉनर विलियम्स को भारतीय टीम के लिए दोबारा कभी खेलने का मौका नहीं मिला। उन्होंने मैदान पर टेस्ट मैच खेला, रन बनाए, लेकिन क्रिकेट की राजनीति और आईसीसी के कड़े नियमों के कारण वह इतिहास के सबसे अभागे खिलाड़ी बन गए. कॉनर विलियम्स की यह कहानी आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे काले और अजीब अध्यायों में से एक मानी जाती है।
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