Bhuvneshwar Kumar Ranji Trophy 2009 : मेरठ की गलियों से निकलकर क्रिकेट का भगवान कहे जाने वाले सचिन का पहला शिकार करने वाले बॉलर की अनसुनी कहानी! 🔥
भारतीय क्रिकेट इतिहास में जब भी स्विंग गेंदबाजी की बात होती है, तो उत्तर प्रदेश के मेरठ से आने वाले भुवनेश्वर कुमार (Bhuvneshwar Kumar) का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा था जब भुवी के पास क्रिकेट खेलने के लिए ढंग के जूते तक नहीं थे? आज हम आपको ‘बेंगलुरु के साइलेंट वॉरियर’ कहे जाने वाले भुवनेश्वर कुमार के संघर्ष, उनके जन्म और उस ऐतिहासिक मैच की कहानी बताएंगे, जिसने उन्हें रातों-रात एक ग्लोबल स्टार बना दिया था.
Bhuvneshwar Kumar Ranji Trophy 2009

जन्म और शुरुआती सफर: मेरठ की गलियों से शुरुआत
भुवनेश्वर कुमार का जन्म 5 फरवरी 1990 को मेरठ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। वह एक बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे। बचपन में जब उनकी बहन को भुवी के भीतर छिपे अद्भुत टैलेंट का अहसास हुआ, तो वह उन्हें अपने पास की ही एक क्रिकेट एकेडमी में लेकर गईं.
जब कोच ने 13 साल के भुवी को पहली बार देखा, तो उनके मन में कई सवाल थे. भुवी का कद बहुत ऊंचा नहीं था और न ही उनकी शारीरिक बनावट बहुत भारी-भरकम थी. लेकिन जब कोच ने उनसे पूछा कि तुम क्या करते हो? तो भुवी का एक ही सीधा जवाब था— “बॉलिंग”. इसके बाद जब उन्होंने पहली बार गेंद हाथ में ली, तो उनका मख्खन जैसा स्मूद रन-अप और जादुई स्विंग एक्शन देखकर कोच पूरी तरह से हैरान रह गए.
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जब 19 साल के भुवी ने सचिन तेंदुलकर को किया ‘0’ पर आउट
यूपी अंडर-15 से शुरू हुआ उनका सफर साल 2009 में एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गया. 2009 का रणजी ट्रॉफी फाइनल मुकाबला उत्तर प्रदेश और मुंबई के बीच खेला जा रहा था. मुंबई की टीम में क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचิน तेंदुलकर क्रीज पर मौजूद थे.
यूपी के कप्तान और भुवी ने मिलकर एक मास्टर प्लान बनाया था. कप्तान ने भुवी से सिर्फ एक बात कही थी, “यह सचिन तेंदुलकर हैं, अगर तुमने इन्हें जरा भी रूम (जगह) दिया तो यह तुम्हें 6 छक्के मार देंगे. इसलिए तुम्हें सिर्फ एक ही स्पॉट पकड़कर लगातार इन-स्विंग गेंद डालनी है.”
क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा चमत्कार:
भुवनेश्वर कुमार ने ठीक वैसी ही इन-स्विंग गेंद डाली जो टप्पा खाकर अंदर की तरफ आई. सचिन तेंदुलकर ने उसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन गेंद उनके बल्ले का अंदरूनी किनारा लेती हुई सीधे शॉर्ट-मिडविकेट पर खड़े फील्डर के हाथों में चली गई. सचिन तेंदुलकर घरेलू रणजी क्रिकेट के इतिहास में पहली बार शून्य (0) पर आउट हुए थे और यह कारनामा करने वाले गेंदबाज दुनिया के एकमात्र खिलाड़ी 19 वर्षीय भुवनेश्वर कुमार बने.
आईपीएल (IPL) में भी बजा भुवी का डंका: नाम दर्ज है ये महा-रिकॉर्ड
घरेलू क्रिकेट में इतिहास रचने के बाद भुवनेश्वर कुमार ने दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग यानी आईपीएल (IPL) में भी अपनी गेंदबाजी का खौफ बनाए रखा। आईपीएल में भुवी के नाम एक ऐसा अनोखा और बेमिसाल रिकॉर्ड दर्ज है जो बड़े से बड़े गेंदबाज के लिए एक सपना होता है।
भुवनेश्वर कुमार आईपीएल के इतिहास के एकमात्र ऐसे गेंदबाज हैं जिन्होंने लगातार दो सीजन (साल 2016 और साल 2017) में ‘पर्पल कैप’ (Purple Cap – सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज) अपने नाम की थी। सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) की तरफ से खेलते हुए उन्होंने साल 2016 में 23 विकेट और साल 2017 में 26 विकेट चटकाए थे। आईपीएल इतिहास में लगातार दो बार पर्पल कैप जीतने का यह महा-रिकॉर्ड आज भी भुवी के नाम सुरक्षित है।
मेरठ की गलियों से निकलकर सचिन तेंदुलकर को शून्य पर आउट करने और फिर आईपीएल में बैक-टू-बैक पर्पल कैप जीतने तक, भुवनेश्वर कुमार का सफर हर युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणादायक है। अपनी स्विंग और सधी हुई लाइन-लेंथ की बदौलत उन्होंने साबित किया कि बिना किसी आक्रामक दिखावे के भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों को घुटने टेकने पर मजबूर किया जा सकता है.
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