Did You Know? Football Borrowed These 6 Rules from Cricket : फुटबॉल के लिए क्रिकेट से आई 6 तकनीकें
भले ही फुटबॉल दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आधुनिक फुटबॉल की कई प्रमुख तकनीकें और नियम असल में क्रिकेट से प्रेरित हैं? यहाँ ऐसी 6 चीजें हैं जो फुटबॉल ने क्रिकेट से कॉपी की हैं:
आईए आपको बताते है पूरी जानकारी विस्तार में जिससे आपको समझ आए ये सारी जानकारी।
Did You Know? Football Borrowed These 6 Rules from Cricket

1. क्रिकेट से आई हॉक आई तकनीक जो फुटबॉल में गोल लाइन नाम से जानी जाती है
क्रिकेट में LBW फैसलों को सटीक बनाने के लिए डॉक्टर पॉल हॉकिन्स ने ‘हॉक-आई’ तकनीक विकसित की थी। इसी तकनीक की सफलता को देखकर 2012 में फुटबॉल ने इसे अपना लिया और इसे ‘गोल-लाइन टेक्नोलॉजी’ नाम दिया।
2. शिन पैड्स जो फुटबॉल में नई है
18वीं शताब्दी में क्रिकेटर्स तेज गेंदबाजों से बचने के लिए अपने पैरों पर पैड्स पहनना शुरू किया था। सैम विडसन (Sam Widdowson) नाम के खिलाड़ी ने इन्हीं क्रिकेट पैड्स को छोटा करके सबसे पहले फुटबॉल में इस्तेमाल किया ताकि चोटों से बचा जा सके।
3. Coin Toss तकनीक
टॉस की शुरुआत क्रिकेट में बल्लेबाजी या गेंदबाजी का फैसला करने के लिए हुई थी। इसके बिना क्रिकेट में बैटिंग और बोलिंग चुनना बहुत मुश्किल हो सकता था ।फुटबॉल ने इसी तरीके को कॉपी किया और आज फुटबॉल में ‘किक-ऑफ’ या अपनी साइड का चुनाव टॉस के जरिए होता है।
4. खेल के लिए बनाए गए नियम
1788 में क्रिकेट दुनिया का पहला खेल बना जिसने अपने लिए लिखित और व्यवस्थित ‘Laws of the Game’ बनाए। 1863 में फुटबॉल ने भी इसी तर्ज पर अपने सेंट्रलाइज्ड रूल्स तैयार किए।
5. क्लब क्रिकेट की संस्कृति
18वीं शताब्दी के इंग्लैंड में क्लब क्रिकेट बहुत लोकप्रिय था। फुटबॉल के मौजूदा क्लब कल्चर की शुरुआत वहीं से हुई, जहाँ क्रिकेट खिलाड़ी ऑफ-सीजन में फिट रहने के लिए फुटबॉल खेलते थे।
6. वीएआर टेक्नोलॉजी
1992 में क्रिकेट में थर्ड अंपायर को रिप्ले देखकर बेहतर निर्णय लेने के लिए इंट्रोड्यूस किया गया था। फुटबॉल ने इस तकनीक को काफी बाद में 2018 में ‘VAR’ (Video Assistant Referee) के नाम से अपनाया, ताकि मैदान पर लिए गए फैसलों की तकनीक से पुष्टि की जा सके।
इन्हीं तकनीकों के कारण खेल में आई निष्पक्षता
इन तकनीकों की हेल्प की वजह ने खेल के प्रति प्रशंसाको के नजरिए को भी बदला है। जहाँ पहले रेफरी या अंपायर के फैसलों को अंतिम माना जाता था, वहीं अब तकनीक ने खेल को अधिक निष्पक्ष बनाया है। यह बदलाव न केवल खिलाड़ियों के लिए वरदान साबित हुआ है, बल्कि दर्शकों के लिए भी रोमांच को दोगुना कर दिया है, क्योंकि अब हर निर्णय की समीक्षा की जा सकती है।
क्रिकेट और फुटबॉल के इस साझा इतिहास से यह भी पता चलता है कि नवाचार की कोई सीमा नहीं होती। 18वीं और 19वीं सदी में जो प्रयोग क्रिकेट के मैदानों पर शुरू हुए थे, आज वे वैश्विक स्तर पर फुटबॉल जैसे लोकप्रिय खेलों की रीढ़ बन चुके हैं। यह खेल जगत के बीच आपसी सहयोग का एक अद्भुत उदाहरण है, जो दर्शाता है कि एक खेल की सीख दूसरे खेल को कैसे नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है।
निष्कर्ष
इन बातों से यह साफ पता चलता है कि क्रिकेट और फुटबॉल के बीच यक पुराना और एतिहासिक संबंध रहा है । कई आधुनिक तकनीकें , जो आज फुटबॉल का अनिवार्य हिस्सा हैं, उनके मूल में क्रिकेट का ही नवाचार (Innovation) है।
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