The Untold Story Behind the Birth of the Asia Cup : कैसे एक अपमान ने बदल दी क्रिकेट की दुनिया और हुआ एशिया कप का जन्म
आज कल क्रिकेट में कई टूर्नामेंट और लीग खेली जाती है उसमें से एक है एशिया कप । क्या आप जानते है की एशिया कप की शुरुआत सिर्फ एक क्रिकेट टूर्नामेंट के रूप में नहीं हुई । बल्कि भारतीय क्रिकेट के स्वाभिमान के रूप में हुई थी ? आज भले ही एशिया कप दुनिया के सबसे बड़े टूर्नामेंट्स में से एक है, लेकिन इसके पीछे की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।
The Untold Story Behind the Birth of the Asia Cup

एक ऐसी घटना जिसने बदल दिया क्रिकेट का नक्शा
यह बात है 1983 वर्ल्ड कप के दौरान की है । उस समय क्रिकेट पर इंग्लैंड की मनॉपली थी और वर्ल्ड कप लगातार तीसरी बार इंग्लैंड में ही आयोजित हो रहा था । भारतीय टीम उस समय इतनी मजबूत स्थित में नहीं थी जितनी कि आज है लोग उस समय भारतीय टीम को अंडरडॉग कहा जाता था । फाइनल मैच से पहले, BCCI के तत्कालीन चेयरमैन एन.के.पी. साल्वे ने इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड से मैच की दो एक्स्ट्रा टिकट्स माँगीं। लेकिन इंग्लैंड बोर्ड ने उन्हें टिकट देने से साफ़ मना कर दिया।
टिकट्स का न मिलना या न मिलना यक अलग बात थी , लेकिन जिस अपमानजनक तरीके से उन्होंने मना किया उसने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को झकझोर दिया। इस घटना के बाद साल्वे ने ठान लिया कि अब क्रिकेट पर किसी एक देश का कब्ज़ा नहीं रहने दिया जाएगा। और इस अपमान को उन्होंने अपने दिल पर ले लिया और इसका उपाय ढूंढने में लग गए।
साल्वे ने कैसे कि एसीसी की स्थापना
एन.के.पी. साल्वे ने हार नहीं मानी और ICC को चुनौती देते हुए प्रस्ताव रखा कि अगला वर्ल्ड कप भारत होस्ट करेगा। परन्तु उस समय क्रिकेट पर इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया जैसे देश का दबदबा था तब ICC ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया । तब साल्वे ने यक नई रणनीति बनाई और एशिया के सभी क्रिकेट बोर्ड्स को एकजुट किया । 1983 वर्ल्ड कप के कुछ ही महीनों बाद, उन्होंने नई दिल्ली में एशियाई क्रिकेट देशों को बुलाया और एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) की स्थापना कि। यह ICC के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट मैच आयोजित करने वाली पहली आधिकारिक संस्था बनी।
शारजाह में कैसा आयोजित हुआ साल 1984 का पहला एशिया कप
एशिया की टीमों के पास तब अच्छे इंफ्रास्ट्रक्चर और टूर्नामेंट होस्ट करने के लिए बड़े बजट की कमी थी। ऐसे में शारजाह के एक क्रिकेट प्रेमी शेख बुकतवीर सामने आए, जो खुद क्रिकेट के बहुत बड़े प्रशंसक थे। उन्होंने पहला एशिया कप शारजाह में आयोजित करने का प्रस्ताव दिया और सारा खर्च उठाने का बीड़ा उठाया। अब एसीसी की ये समस्या भी खत्म हो गई थी । और आयोजन का काम भी हो गया था ।
परिणामस्वरूप, 1984 में पहला एशिया कप शारजाह में खेला गया, जिसे भारत ने जीतकर अपने नाम किया। इस जीत ने न केवल भारत का मान बढ़ाया, बल्कि ICC को यह ‘सॉफ्ट पावर’ दिखा दी कि अब क्रिकेट के बड़े टूर्नामेंट्स एशिया में भी आयोजित हो सकते हैं। साल्वे की इस जिद ने आईसीसी को बता दिया था कि आने वाले समय में भारत की स्थिति कितनी मजबूत होने वाली है और कभी किसी के आगे कभी नहीं झुकने वाली है ।
निष्कर्ष: आखरी में भारतीय क्रिकेट की एक बड़ी जीत हुई ।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) की इस रणनीतिक जीत ने ICC को झुकने पर मजबूर कर दिया। परिणामस्वरूप, ICC ने 1987 के वर्ल्ड कप की मेजबानी के अधिकार भारत को दे दिए। एशिया कप की शुरुआत सिर्फ खिलाड़ियों के खेल की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस आत्मविश्वास की कहानी है जिसने भारतीय क्रिकेट को दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बना दिया।
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