Nepotism vs Hardwork : सांसद का बेटा होना या नेपोटिजम का टैग ? क्या इस क्रिकेटर की मेहनत लोगो को दिखाई नहीं देती

Nepotism vs Hardwork : सांसद का बेटा होना या नेपोटिजम का टैग ? क्या इस क्रिकेटर की मेहनत लोगो को दिखाई नहीं देती

क्रिकेट यक ऐसा खेल है जहां या तो आपका bat बोलता है या बॉल ना की आपके परिवार का नाम । लेकिन क्या होगंजब आपके परिवार का नाम हो आपके टैलेंट के आड़े आ जाए । यक ऐसा ही यांग क्रिकेटर जो एक सांसद का बेटा है । आज नेपोटिजम और प्रिविलेज जैसे तनों से लड़कर अपनी जगह बना रहा है ।

Nepotism vs Hardwork

Nepotism vs Hardwork
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एक टैग जो पीछा नहीं छोड़ता – ये तो सांसद का बेटा है ।

जब कोई प्लेयर एक बड़े पॉलिटिशियन का बेटा होता है तो लोगो के लिया वह सिर्फ यक नेपोटिज्म प्लेयर बनके रह जाता है । लोग उसकी मेहनत पसीने और संघर्ष को नहीं देखते बल्कि यह देखते है कि उसके पापा कौन है । उस प्लेयर को उन लोगों के ताने का समाना करना पड़ रहा है जो उसे पर्ची वाला प्लेयर कहते है ।

प्रिविलेज के पीछे का असली स्ट्रगल 

हालांकि यक अच्छे परिवार से होने का फायदा मिलता है  – जैसे अच्छी फैसिलिटीज और अच्छी कोचिंग । लेकिन क्या ये काफी है । मैदान पर जब 140+ की रफ्तार से गेंद आती है । तो वह कोई सांसद आपकी मदद नहीं कर सकता । वह सिर्फ आपके रिफ्लेक्स और कन्सन्ट्रेशन ही काम आता है । DPL जैसे टूर्नामेंट में 449 रन बनाना दिखाता है कि उनके पास सिर्फ नाम नहीं बल्कि असली गेम भी है ।

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क्या दबाव और आलोचनाएं उनकी परफॉर्मेंस को प्रभावित कर पाएगी ।

अक्सर लोग भूल जाते है कि एक सांसद या बड़े पद पर बैठे व्यक्ति का बेटा होने का मतलब सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि असीमित उम्मीदें भी है । इन खिलाड़ियों को मैदान पर सिर्फ विपक्षी टीम से नहीं बल्कि दर्शक के की उन उम्मीदों और तनों  से भी लड़ना पड़ता है जो यह मानकर चलते है कि इन्होंने अपनी जगह सिफारिश से बनाई है । इस तरह के नकारात्मक माहौल में खुद को साबित करना किसी भी सामान्य खिलाड़ी के लिया मुश्किल होता है । जहां यक आम खिलाड़ी अपनी गलती के लिए सिर्फ खेल का जिम्मेदार होता है । वहीं इन खिलाड़ियों को अपनी एक छोटी सी गलती के लिए अपने पूरे परिवार के नाम और  आलोचनाओं को सहन करना पड़ता है । यह मानसिक जंग ही तय करती है कि क्या खिलाड़ी वाकई लंबे समय तक क्रिकेट की दुनिया में टिक पाएगा या नहीं।

क्या कभी हट पाएगा नेपोटिज्म का धब्बा 

सच तो यह है की क्रिकेट में टैलेंट कभी छिपा नहीं रह सकता । अगर प्लेयर परफॉर्मेंस देगा तो लोग उससे प्यार और पसंद करने लगेगा । ये सिर्फ प्लेयर ही नहीं बल्कि हर उस एथलीट की कहानी है जिसे प्रिविलेज के कारण प्रूव कर्म पड़ता है ।

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निष्कर्ष (Conclusion)

Nepotism यक रियलिटी है पर क्या वो किसी के करियर के लिए अंत होना चाहिए। यक क्रिकेटर के लिए उसका करियर मैदान पर शुरू होता है और मैदान पर ही खत्म होता है । यह यांग प्लेयर अपनी मेहनत से देख रहा है कि वो सिर्फ किसी का बेटा नहीं यक फ्यूचर स्टार बनने की काबिलियत रखता है ।

हम जिसकी बात कर रहे है वो कोई और नहीं बल्कि सांसद पप्पू यादव के बेटे सार्थक रंजन है 

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