VVS Laxman IPL Sacrifice : जब VVS Laxman ने कुर्बान किए थे करोड़ों रुपये, उनके एक फैसले ने बदल दी रोहित शर्मा और डेक्कन चार्जर्स की किस्मत!
आईपीएल (IPL) में आज जब खिलाड़ियों पर 20-25 करोड़ रुपये की अंधाधुंध बरसात होती है, तब त्याग और टीम भावना की बातें थोड़ी अजीब लग सकती हैं। लेकिन साल 2008 में आईपीएल के बिल्कुल शुरुआती सीजन में भारतीय क्रिकेट के दिग्गज वीवीएस लक्ष्मण (VVS Laxman) ने एक ऐसा ऐतिहासिक त्याग किया था, जिसने न सिर्फ उनकी टीम की किस्मत बदली, बल्कि भारतीय क्रिकेट के ‘हिटमैन’ रोहित शर्मा के सफल करियर की नींव भी रखी।
आइए जानते हैं आईपीएल 2008 और 2009 की वह अनसुनी कहानी, जब लक्ष्मण के एक फैसले ने डेक्कन चार्जर्स (Deccan Chargers) को अर्श से फर्श पर पहुंचा दिया।
VVS Laxman IPL Sacrifice
क्या था साल 2008 का ‘Icon Player’ नियम?
आईपीएल के पहले सीजन (2008) में बीसीसीआई ने घरेलू स्टार खिलाड़ियों के लिए ‘आइकन प्लेयर’ (Icon Player) का नियम बनाया था। इस नियम के तहत सचिन तेंदुलकर (मुंबई इंडियंस), सौरव गांगुली (KKR), राहुल द्रविड़ (RCB), और युवराज सिंह (किंग्स इलेवन पंजाब) को उनकी टीम का आइकन खिलाड़ी चुना गया था।
नियम यह था: आइकन खिलाड़ी को टीम के सबसे महंगे बिकने वाले खिलाड़ी से 15% ज्यादा सैलरी मिलेगी। यानी टीम का बजट जितना भारी खिलाड़ी खरीदेगा, आइकन प्लेयर की जेब में उतने ही ज्यादा पैसे जाएंगे।
जब लक्ष्मण ने ठुकराया ‘आइकन’ का टैग और करोड़ों रुपये

डेक्कन चार्जर्स की फ्रेंचाइजी वीवीएस लक्ष्मण को अपना आइकन प्लेयर बनाना चाहती थी। अगर लक्ष्मण हां कर देते, तो उन्हें आसानी से 5 से 6 करोड़ रुपये मिलते। लेकिन लक्ष्मण जानते थे कि अगर उनकी सैलरी में इतना बड़ा हिस्सा चला गया, तो टीम के पास नीलामी (Auction) में दूसरे बड़े विदेशी और युवा खिलाड़ियों को खरीदने का बजट नहीं बचेगा।
टीम के हित को आगे रखते हुए लक्ष्मण ने आइकन बनने से साफ मना कर दिया और केवल 1.5 करोड़ रुपये की मामूली फीस पर खेलने के लिए तैयार हो गए!
गिलक्रिस्ट, सायमंड्स और रोहित शर्मा की एंट्री
लक्ष्मण के इस बड़े त्याग की वजह से डेक्कन चार्जर्स का पर्स खाली रहा और उन्होंने ऑक्शन में दुनिया के सबसे खतरनाक खिलाड़ियों पर दांव लगाया:
- एडम गिलक्रिस्ट (विस्फोटक ऑस्ट्रेलियाई कीपर-बल्लेबाज)
- एंड्रयू सायमंड्स (दुनिया के सबसे महंगे ऑलराउंडर)
- रोहित शर्मा (युवा भारतीय सनसनी, जिन्हें 3 करोड़ रुपये में खरीदा गया)
2008 की नाकामी और 2009 का ऐतिहासिक कमबैक

साल 2008 में लक्ष्मण टीम के कप्तान बने, लेकिन खराब फॉर्म और खराब प्रदर्शन के कारण डेक्कन चार्जर्स की टीम पॉइंट्स टेबल में सबसे नीचे रही। इसके बाद साल 2009 में लक्ष्मण ने एक बार फिर बड़प्पन दिखाया। उन्होंने खुद कप्तानी से हटने की सिफारिश की और एडम गिलक्रिस्ट को कप्तान बनाने का सुझाव दिया।
नतीजा? साल 2009 में साउथ अफ्रीका की धरती पर डेक्कन चार्जर्स ने इतिहास रचते हुए आईपीएल की चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम कर ली!
रोहित शर्मा के लिए टर्निंग पॉइंट
अगर उस वक्त लक्ष्मण ने अपनी सैलरी कुर्बान न की होती, तो शायद डेक्कन चार्जर्स रोहित शर्मा को कभी खरीद ही नहीं पाती। रोहित ने उसी सीजन में न सिर्फ शानदार बल्लेबाजी की, बल्कि गिलक्रिस्ट की कप्तानी में उप-कप्तानी के गुर भी सीखे। यही वह टर्निंग पॉइंट था जिसने रोहित शर्मा को आईपीएल इतिहास का सबसे सफल कप्तान (5 ट्रॉफी) बनने की राह दिखाई!
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